कौन जीने के लिए मरता रहे
लो सँभालो अपनी दुनिया हम चले
...........✍अख़्तर सईद ख़ान
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दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता,
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिये।
...........✍निदा फ़ाज़ली
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खाली पड़ा हुवा हे वरक़ दिल के बाब मे.
अपना हिसाब लिख दे तु मेरी किताब मे!!
✏मिर्ज़ा ग़ालिब
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भुला दीं हम ने किताबें कि उस परी-रू के......
किताबी चेहरे के आगे किताब है क्या चीज़
.........✍नज़ीर अकबराबादी
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो.....
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो....
...........✍निदा फ़ाज़ली
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बद-क़िस्मती को ये भी गवारा न हो सका....
हम जिस पे मर मिटे वो हमारा न हो सका....
..........✍शकेब जलाली
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बुलबुल को बाग़बाँ से न सय्याद से गिला....
क़िस्मत में क़ैद लिक्खी थी फ़स्ल-ए-बहार में....
.............✍बहादुर शाह ज़फ़र
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कब हँसा था जो ये कहते हो कि रोना होगा....
हो रहेगा मिरी क़िस्मत में जो होना होगा.....
..............✍ना मालूम
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जिसे पढ़ते तो याद आता था तेरा फूल सा चेहरा
हमारी सब किताबों में इक ऐसा बाब रहता था
..............असअद बदायुनी
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खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए.....
सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझ को....
............✍नज़ीर बाक़री
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Saturday, 4 February 2017
HINDI SHAYARI
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