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Saturday, 4 February 2017

HINDI SHAYARI



कौन जीने के लिए मरता रहे

लो सँभालो अपनी दुनिया हम चले

...........✍अख़्तर सईद ख़ान

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दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता,

दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिये।

...........✍निदा फ़ाज़ली

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खाली पड़ा हुवा हे वरक़ दिल के बाब मे.


अपना हिसाब लिख दे तु मेरी किताब मे!!

✏मिर्ज़ा ग़ालिब

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भुला दीं हम ने किताबें कि उस परी-रू के......

किताबी चेहरे के आगे किताब है क्या चीज़

.........✍नज़ीर अकबराबादी

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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो.....

ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो....


...........✍निदा फ़ाज़ली

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बद-क़िस्मती को ये भी गवारा न हो सका....

हम जिस पे मर मिटे वो हमारा न हो सका....

..........✍शकेब जलाली

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बुलबुल को बाग़बाँ से न सय्याद से गिला....

क़िस्मत में क़ैद लिक्खी थी फ़स्ल-ए-बहार में....

.............✍बहादुर शाह ज़फ़र

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कब हँसा था जो ये कहते हो कि रोना होगा....

हो रहेगा मिरी क़िस्मत में जो होना होगा.....

..............✍ना मालूम

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जिसे पढ़ते तो याद आता था तेरा फूल सा चेहरा

हमारी सब किताबों में इक ऐसा बाब रहता था

..............असअद बदायुनी

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खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए.....

सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझ को....

............✍नज़ीर बाक़री
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